गलघोंटू रोग (Heamorrhagic Septicemia): लक्षण, कारण और उपचार

Hemorrhagic Septicemia (गलघोंटू) in Cattle

गलघोंटू, जिसे Heamorrhagic Septicemia के नाम से भी जाना जाता है, एक जीवाणु जनित रोग है जो गायों और भैंसों में तेजी से फैलता है। यह संक्रामक रोग ज्यादातर बरसात के मौसम में पाया जाता है और पशु की मौत जल्द ही हो जाती है। इस लेख में, हम गलघोंटू के लक्षण, कारण, निदान और उपचार के बारे में विस्तार से जानेंगे।

गलघोंटू के अन्य नाम (Alternate Names of Hemorrhagic Septicemia)

  • गलघोंटू रोग (H.S) को "घुड़का, नाविक बुखार, गरगति, पास्चुरेलोसिस, Shipping Fever, Barbone, Stockyardis Disease" भी कहा जाता है।
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Discovery Of Pasteurella Multocida Becteria 

  • Pasteurella Multocida , एक ग्राम-नेगेटिव जीवाणु (Gram Negative Becteria), जिसे 1878 में पेरॉंसीटो (Perroncito) द्वारा खोजा गया। 
  • 1880 में लुइ पाश्चर द्वारा सबसे पहले मुर्गी के रोग में इस Gram Negative Becteria को अलग किया गया। जिसके कारण  Pasteurella Multocida जीवाणु का नाम लुई पाश्चर के नाम रखा गया। 
  • इसके बाद, Pasteurella Multocida को सूअरों में एट्रोफिक राइनाइटिस (Atrophic Rhinitis), मवेशियों में Hemorrhagic Septicemia , और कई अन्य जानवरों में श्वसन रोगों का कारण भी पाया गया।
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गलघोंटू का कारण (Causes of Hemorrhagic Septicemia)

  • गलघोंटू रोग का कारण पास्चुरेल्ला माल्टोसीडा (Pasteurella Multocida) नामक जीवाणु है। पास्चुरेल्ला माल्टोसीडा एक ग्राम नेगेटिव बेक्टेरिया (Gram Negative Becteria) है।  Pasteurella Multocida Bacteria एक Bipolar जीवाणु है।
  • यह जीवाणु पशुओं की साँस नली (Respiratory Track) में मौजूद रहते हैं और लंबे समय तक जीवित रहते हैं। 
  • इस रोग से ग्रसित पशुओं में 80-90% मौत हो जाती है। गलघोंटू रोग की अवधि 2 - 3 दिन तक होती है। इसी कारण गलघोंटू रोग को Percute Disease की श्रेणी में रखा जाता है। गलघोंटू रोग 6 माह से 2 वर्ष के पशुओं में अधिक होता है।

  • गलघोंटू रोग मुख्यत भैंसो में देखने को मिलता है।
  • गलघोंटू तब होता है जब पशु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाया जाता है जिससे पशु थकान और भूख से ग्रसित होता है। वातावरण में नमी के कारण यह बैक्टीरिया पशु पर हावी हो जाता है और पशु रोग से ग्रसित हो जाता है। साथ ही पशु को तेज बुखार आता है। इसी कारण इस बीमारी को शिपिंग फीवर (Shipping Fever) भी कहते हैं।

गलघोंटू रोग के लक्षण (Symptoms of Hemorrhagic Septicemia)

1. High Fever and Shivering
  • पशु को तेज बुखार (104°F – 107°F) और शरीर में ठंड के कारण कंपन होता है।
2. Brisket Swelling 
  • गले के नीचे और अगले पैरों के बीच में गर्म, कठोर पीड़ादायक सूजन होती है (Brisket Swelling)। इस प्रकार की सूजन को दबाने में गड्ढा नहीं बनता, जो कि H.S रोग का मुख्य लक्षण है।
3. Difficulty in Breathing
  • गले के नीचे सूजन के कारण पशु को साँस लेने में तकलीफ और घर्र - घर्र की आवाज आती है जो कि पशु की मौत का कारण बन जाता है। 
  • पशु के ब्लड में ऑक्सीजन की कमी के कारण Hypoxia से पशु की मौत हो जाती है।
4. Mouth and Nasal Discharge
  • रोगी पशु के मुहं से लार और नथूनों से गाढ़ा म्यूक्स गिरता है।
5. Red Mucous Membranes
  • आँखों और अन्य अंगों की म्यूक्स मेम्ब्रेन (Mucus Membrane) गहरे लाल रंग की हो जाती है।

गलघोंटू का निदान (Diagnosis of Hemorrhagic Septicemia)

1. Based on Symptoms: 
  • Diagnosis can be made by observing the symptoms.
2. Blood and Nasal Discharge Tests: 
  • Blood and nasal discharge tests help in diagnosis.
3. Postmortem Examination: 
  • Postmortem examination revealing swelling under the throat without a pit on pressing is a key indicator of HS.

Causes of Death in Animals

Respiratory System Failure: 
  • Severe difficulty in breathing due to the hard swelling under the throat (Dyspnea) leads to death. (गले के नीचे कठोर सूजन के कारण भारी साँस लेने में तकलीफ (Dysponea) से पशु की मौत हो जाती है (Respiration System Failure)।)
Hypoxia: 
  • Oxygen deficiency in the blood causes hypoxia, resulting in death.
Bacterial Toxicity: 
  • The toxicity of Pasteurella multocida in the blood causes death.

Hemorrhagic Septicemia in Cattle

Aspect Details
Alternate Names घुड़का, नाविक बुखार, गरगति, पास्चुरेलोसिस, Shipping Fever, Barbone, Stockyardis Disease
Discovery of Pasteurella Multocida Discovered in 1878 by Perroncito. In 1880, Louis Pasteur isolated it from chickens.
Causes (Etiology) Pasteurella Multocida (Gram Negative Bacteria). Lives in the respiratory tract of animals.
Symptoms 1. High Fever and Shivering (104°F – 107°F)
2. Brisket Swelling (no pit on pressing)
3. Difficulty in Breathing
4. Mouth and Nasal Discharge
Causes of Death 1. Respiratory System Failure
2. Hypoxia
3. Bacterial Toxicity
Drug of Choice: Drug of Choice: Sulphonamide + Trimethoprim (Dose Rate: 15 - 30 mg/Kg b.wt)
Rajasthan Express: Comprehensive Guide to Animal Diseases in India

गलघोंटू का उपचार (Treatment of Hemorrhagic Septicemia)

Injection: 
  • Sulpha Drugs + Trimethoprim Combined Injection.
  • Injection: Moxel I/M (Intramuscular).
Fluid Therapy:
  • Administer fluid therapy (e.g., D.N.S, R.L, N.S.S).
Supportive Treatment:
Drug of Choice for HS Disease:
  • Injection: Sulphonamide + Trimethoprim
  • Dose Rate : 15 - 30 mg/Kg b.wt (Sulphonamide + Trimethoprim)

Vaccinattion of Heamorrhagic Septicemia 

  • गाय - भेंसो में गलघोंटू रोग के रोकथाम के लिए HS Vaccine लगाई जाती है। 
  • HS Vaccine का प्राथमिक टीका 6 माह की उम्र पर व् पुन : टीकाकरण प्रतिवर्ष मानसून से पहले (मई - जून) लगाया जाता है।

1. Primary Vaccination:

Age:
  • 6 months
Dose: 
  • 5 ml
Route: 
  • Subcutaneous (S/C)
2. Annual Booster:

Timing: 
  • Before the onset of the monsoon season (May - June)

Vaccine Administration:

  • Ensure that the animal is healthy before vaccination.
  • Use sterile equipment and maintain hygienic conditions to prevent infection.
  • Administer the vaccine subcutaneously, preferably in the neck region. 
This blog post provides essential information about Hemorrhagic Septicemia (HS), helping livestock owners understand, identify, and treat this infectious disease. Proper diagnosis and treatment can help control the disease and save the lives of affected animals.

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